ताना-बाना

कथरी : एक देसी बिछावन

कथरी, न सिर्फ एक देसी बिछावन है बल्कि हमारी आत्मनिर्भरता का एक छोटा सा सुन्दर उदहारण भी है। इसे कहीं-कहीं "दसनी" भी कहते है। यह पुराने कपड़ों, चादरों और साड़ियों को आपस में परत-से -परत जोड़कर बनाई जाने वाली एक मोटी चादर जैसी होती है जिसका प्रयोग सामान्यतः बिछावन के रूप में किया जाता है। विशेषता पुराने समय में जब सोने-बिछाने के लिए गद्दे या चादर आसानी...

देसी स्वाद

बेसन के लड्डू : मिठास परंपरा की अनोखी मिठाई

भारतीय मिठाइयों में बेसन के लड्डू का एक अलग ही स्थान है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है बल्कि अपनी सरलता और पारंपरिक पहचान के कारण भी विशेष माना जाता है। कोई भी शुभ अवसर, तीज-त्यौहार या पूजा-पाठ हो, बेसन के लड्डू के बिना अधूरा लगता है। मान्यता है कि भगवान को प्रसाद स्वरूप लड्डू अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही...

तीज त्यौहार

सकट चौथ व्रत : संतान की सुख-समृद्धि का पर्व

सकट चौथ का व्रत महिलाएं अपने संतान की लम्बी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस व्रत को गणेश चौथ या तिलकुटा चौथ व्रत के नाम से भी जाना जाता है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती है। पूजन-व्रत की विधि सकट चौथ के दिन महिलाएं...

तीज त्यौहार

शंख : धार्मिक व वैज्ञानिक महत्त्व

सनातन परंपरा में शंख और उसकी ध्वनि को अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन में प्राप्त 14 रत्नों में एक शंख भी था। शंख को धार्मिक, वास्तु और आयुर्वेदिक महत्व भी प्राप्त है। कई वैज्ञनिक शोध भी इस पारंपरिक महत्ता पर अपनी मुहर लगा चुके हैं। शंख की उत्त्पत्ति विज्ञान की नजर से बात करें तो शंख एक समुद्री जलचर घोंघे का...

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चावल की ढूढ़ी

चावल की ढूढ़ी मकर संक्रांति के पर्व पर बनाया व खाया जाने वाला एक पारंपरिक लड्डू है। खिचड़ी पर बहन एवं बेटिओं के घर अनाज व अन्य मिष्ठानों के साथ ढूढ़ी भी भेजने का रिवाज है। संक्रांति के अवसर पर बनाई गयी ढूढ़ी को कई महीनों तक रखकर खाया जाता है। सामग्री- चावल का आटा- 500 ग्राम गुड़- 500 ग्राम सुखी गरी (नारियल)- चौथाई कप छोटे टुकड़ो में कटी हुई देसी घी-...

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तिल के लड्डू

तिल के लड्डू बनाने के लिये आंच पर कढ़ाही को चढ़ाकर हल्का गरम करें। अब इसमे तिल डालकर लगातार करछी से चलातेहुए भूनें जब तक कि तिल का रंग सुनहरा ना हो जाय व तिल तड़कने न लगे। सोंधी-सोंधी खुशबू आने पर समझ लें कि तिल भुन गया है। भुने हुए तिल को एक बर्तन में निकाल लें। अब उसी कढ़ाही में गुड़ और दो कप पानी डालकर चाशनी बनायें। चाशनी तैयार हो गया है, यह देखने के लिये एक...